Wednesday, September 26, 2018

拉中环境议题会商机制亟待完善

中国清楚地知道自己在中拉关系中的利益诉求,但拉美是否清楚自己希望从与中国的合作中得到些什么?

11月8日在智利圣地亚哥举行的中国—拉美多学科聚焦网络( )第二次国际会议上,专家们表示,该地区必须拿出清晰的对华合作战略。

但是,拉丁美洲的政治分化将使这一目的难以实现。厄瓜多尔高等教育部副部长阿德里安•博尼拉表示:“该地区有一半的国内生产总值来自厄瓜多尔、玻利维亚和委内瑞拉这种受保护的经济体,另外一半则来自智利和秘鲁等开放的市场经济体。

该地区与中国不断增长的贸易是建立在原材料出口和高科技产品和工业制成品进口的基础上的。中国的投资也主要集中在为促进上述贸易的能源和交通基础设施领域,但这些投资却带来了社会、环境和经济风险。

2016年,中国外交部发布白皮书,阐述了与拉美的长期合作计划。对此,只有智利一国正式做出回应。白皮书指出,中国-拉美和加勒比国家共同体( )论坛是合作和参与该地区事务的主要平台。

当中拉对话的记者问到中国—拉共体论坛是否是一个可以就改进中拉关系进行紧急讨论的单向对话机制时,博尼拉表示:“论坛不是单向的对话,它共由33个对话机制组成,”他还补充说,论坛无法处理拉美国家寻求与中国经济互补方面的多种需求,各国应着力改善其与中国的双边关系。

博尼拉证实,像对待欧洲和美国一样,中国也制定了对拉战略。但是,对于即将于明年一月份在智利首都举行第二届中拉论坛部长级会议的拉共体来说,不仅没有针对上述任何一个地区制定相应的战略,甚至连机构职能都不完备(连电话号码或网站都没有)。

环境对话迫在眉睫

如果中国—拉共体论坛无法实现有意义的环境对话,那么中国和拉美能通过怎样的机制展开有效的环境问题讨论呢?

今年年底前,中国将把二十国集团( )轮值主席国的位置移交给阿根廷。二十国集团在上届杭州峰会上做出了推进环境议程的重大承诺。

那么,2018年在布宜诺斯艾利斯举行的会议中会有怎样值得期待的成果呢?

根据阿根廷布宜诺斯艾利斯国家与社会研究中心的经济学家莱昂纳多·斯坦利的说法,二十国集团中美国支持化石能源将使各国实现绿色承诺的难度加大,其中包括取消化石能源补贴的问题。他说:“机会虽然存在,但保持现状停步不前的几率也很高。

斯坦利指出,阿根廷已着手通过提高价格上限来解决化石能源补贴的问题。但是这种做法把所有的重心都放在了消费者需求上,“在供给侧,政府仍有发展(页岩油气田)瓦卡穆尔塔的政策。”

阿根廷亦大力推动可再生能源的投资。斯坦利说,荒唐的是,该领域的投资却没有享受到政府补贴。

民间组织的活动空间

在中国和拉美国家,民间组织一直是要求地方和国家提高环保标准的关键力量。

西班牙萨拉曼卡大学的研究员鲁本·冈萨雷斯认为,由于可供国际环境组织运作的空间往往是有限的,因此,确保多边论坛听取他们意见的难度很大。

“在矿产冲突的问题上,拉丁美洲的民间组织有时可以依靠国际非政府组织的支持,而这种联合对于中国来说却不太适用,”中—拉多学科聚焦网络第二次国际会议环境专题小组成员冈萨雷斯表示。

根据汉堡大学研究员希梅娜·萨帕塔的说法,她的祖国厄瓜多尔政府的做法并未缓解现状。他们发放特许开采权的做法不当,对外宣称支持新的生态环保理念,实际上却追求一种“采掘主义”的发展模式。

比如,该国政府曾向中资的科里安特公司( )发放了开采许可证,而该许可证标的所在地属于一块名义上的保护区。

中拉对话近期的一份调查也将人们的注意力引向了厄瓜多尔与中国公司之间交易的不透明。

双向学习

中国社会科学院拉美问题研究专家吴国平说,为满足中国日益增长的需求,包括智利在内的一些国家也在通过水果出口获益。这些国家正在适应新的发展常态,不断提升双方关系的活力。

但是,不仅仅是拉美国家有很多要学的东西。吴国平问道,比如,与不熟悉中方雇佣政策的拉美工会打交道,中国公司是否已经准备好了呢?

然而,吴国平也表达了他在这个问题上乐观的态度。中国在拉丁美洲正推行一种新的公私伙伴关系( )模式。这可能会使当地的合作伙伴获利,并有利于推进招标进程。

“他们必须了解和充分利用劳动力市场,虽然仍有许多工作要做,但是他们正在学习。”

Monday, September 10, 2018

बैटरी वाली गाड़ी के ज़रिए जीविका तलाशतीं तीन महिलाएं

संतोषी मुंडा, जानकी कुमारी मुंडा और सुमन देवी रांची की सड़कों पर सरपट बैटरी रिक्शा (ई-रिक्शा) दौड़ाती हैं. यहां अब तक ये काम मर्दों का ही माना जाता था, लेकिन अब ये तीन महिलाएं भी इसमें अपनी किस्मत आज़मा रही हैं.
इसके पीछे तीनों की ज़रूरतों की अलग-अलग कहानियां हैं. लेकिन इन तीनों के सामने मुश्किलें कुछ एक-सी ही हैं- इन्हें अपने काम के कारण कई बार पुरुषों से भद्दे ताने सुनने पड़ते हैं.
ये तीनों ही इन तानों का जबाब देना पसंद नहीं करतीं. इनका कहना है कि उनके लिए कमाई करना ज़रूरी है ना कि किसी तरह के विवाद में पड़ना.
मैंने तीनों से यही सवाल किया ये बैटरी रिक्शा ही क्यों चलाती हैं, ऑटो भी तो चला सकती हैं? इस प्रश्न के उत्तर में उनके जवाब कुछ इस तरह के होते हैं.
"मैं किसी पर बोझ बनना नहीं चाहती. मेरे बच्चे का भविष्य भी तो मेरी जिम्मेदारी है, तो मुझे जो काम मिला वो करती हूं."इस महगांई में बच्चों की पढ़ाई और शहर में रहना और मकान का किराया देना आसान नहीं है. परिवार चलाना है तो कमाना पड़ेगा ही. जो ज़रिया मिला, उसे अपना लिया. अब कमाने वाला मर्द हो या औरत, क्या फर्क पड़ता है."
"कौन क्या कहता है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. कमाई होगी तभी तो खाना मिलेगा इसमें शर्म की या बात है."
सुमन देवी, जानकी कुमारी मुंडा और संतोषी मुंडा रोज़ाना बैटरी रिक्शा चलाकर 800 से 1,000 रुपये तक कमा लेती हैं. वो अपना रिक्शा मर्दों की रिक्शा के साथ ही कतारों लगाती हैं.
रांची जिला ई-रिक्शा चालक यूनियन के अध्यक्ष दिनेश सोनी कहते हैं, "फ़िलहाल रांची में यही तीन महिलाएं ही ई-रिक्शा चलाती हैं, लेकिन हम उम्मीद कर रहे हैं कि इन्हें देखकर और महिलाएं भी इस काम में आगे आएंगी."ल की संतोषी मुंडा और 27 साल की जानकी कुमारी मुंडा आदिवासी हैं. वो कहीं और से काम की तलाश में रांची आई थीं.
संतोषी रांची से चालीस किलोमीटर दूर सिल्ली की रहनेवाली हैं. वो सालों पहले रांची आ गई थीं और किराए पर मकान ले कर रहने लगीं.
संतोषी जब एक साल की थीं उनकी मां का देहांत हो गया था. इसके बाद उनके पिता घर छोड़ कर चले गए थे. उनके परिवार में अब उनके अलावा दो भाई और दो बहनें थीं जो उनसे बड़े थे. संतोषी के बड़े भाई सबको लेकर रांची आ गये और यहीं पर काम करने लगे.
वो कहती हैं कि मां के बाद पता नहीं पिताजी कहीं चले गए, उनका पता नहीं चल पाया.
"मेरी बड़ी दीदी बाई का काम करती थीं. आठ साल में मैं अपनी बड़ी दीदी के काम में हाथ बंटाने लगी और उनका साथ जाने लगी. मैं फुटबॉल खेलना चाहती थी लेकिन मेरे भाईयों ने मुझे दाई का काम सीख कर आगे वही काम करने की सलाह दी."
संतोषी मुंडा कहती हैं "मैंने भाई का घर छोड़ दिया और मेरी दीदी जहां काम करती थीं वहां काम करने लगी और उन्होंने मुझे रहने की जगह दी. बाद में कुछ दोस्तों से मदद मैंने पहले स्कूटी चलाई और उसके बाद ड्राइविंग सीखी."
"इसके बाद मैंने टैक्सी चलानी शुरू की और काफ़ी पैसे जमा किए ताकि मैं अपनी टैक्सी ख़रीद सकूं. जब ई-रिक्शा आया तो मुझे लगा कि मैं ये खरीद सकती हूं, लेकिन पैसे पूरे नहीं पड़े."
"फिर मैंने सोचा किराए पर ही गाड़ी लेकर चला लूं. सो मैंने 300 रुपये प्रतिदिन किराए पर ई-रक्शा किराए पर ले लिया. मैंने जिससे गाड़ी ली उसने मुझसे समय पर पैसे देने के लिए कहा औऱ गाड़ी दे दी."
बीते दो साल से संतोषी मुंडा बैटरी रिक्शा चला रही हैं. उनका कहना है कि वो हर महीने करीब 20 से 25 हज़ार रुपये तक इस काम से कमा लेती हैं जिसमें से गाड़ी का किराया और उनका खर्च आसानी से निकल जाता है.
जानकी मुंडा का गांव टाटी सिल्वा रांची से क़रीब 20 किलोमीटर दूर है. शादी के बाद वो अपने पति के घर रांची आ गईं.
उनके पति ऑटोरिक्शा चलाते हैं और यही परिवार की आय का एकमात्र ज़रिया है. लेकिन एक बेटी और एक बेटा होने के बाद उनके लिए घर चलाना मुश्किल हो रहा था. बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाना और घर का किराया देना संभव नहीं था.
अपनी जमा पूंजी जोड़ कर और दोस्तों से उधार लेकर उन्होंने एक बैटरी रिक्शा खरीदा और सोचा कि इसे किराए पर लगा देंगे.
लेकिन बैटरी रिक्शा किराए पर लेने के लिए कोई सामने नहीं आया और वो ऐसे ही पड़ी रही. इसके बाद जानकी ने फ़ैसला किया कि वो इसे ख़ुद चलाएंगी.
जानकी कहती हैं, "मेरा बेटा प्राइवेट बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता है और बेटी भी प्राइवेट स्कू्ल में है. उनकी फ़ीस, घर का किराया और राशन सभी इसी की कमाई से पूरा हो पाता है." साल की सुमन देवी अपने पति के निधन के बाद वापिस अपने मायके लौट आईं जो रांची के हीनू में है. उनके साथ उनका बेटा था और वो नहीं चाहती थीं कि वो अपने परिवार के लिए बोझ बनें.
सुमन कहती हैं, "मेरा बेटा छह महीने का था जब मेरे पति इस दुनिया से चले गए. जब मेरा बच्चा जब पांच साल का हुआ तो मैं उसका एडमिशन प्राइवेट स्कूल में कराना चाहती थी. लेकिन इसके लिए मुझे काफी परेशान होना पड़ा. तभी मैंने सोच लिया था कि मुझे काम करना शुरू करना पड़ेगा.
"मैंने रांची में एक लेडीज़ गारमेंट्स की दुकान में आठ साल काम किया और पैसा जमा किया. मुझे कम से कम रहने के लिए एक छत मिली थी तो मैं पैसा समा कर सकती थी."
"फिर मैंने देखा कि बैटरी रिक्शा चला कर अपना खुद का काम कर सकती हूं. इसके बाद मैंने रिक्शा चलाना सीखा और रिक्शा खरीद कर खुद उसे चलाने लगी. पिछले छह महीने से बैटरी रिक्शा चला रही हूं."
सुमन कहती हैं कि वो इस काम से रोज़ाना लगभग 800 रुपये कमा लेती हैं. सुमन अपने बेटे को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती हैं और उसे इंजीनियर बनाना चाहती हैं.

Thursday, September 6, 2018

香港确诊首例猪流感

据英国《卫报》报道,亚洲首例猪流感病例周五被香港特别行政区政府证实。与此同时,此次甲型H1N1流感爆发最为严重的墨西哥,开始实施为期5天的全国性戒严,以控制流感的蔓延。在全球范围内,超过330个病例已被世界卫生组织确诊。

香港特区行政长官曾荫权说,一位途经中国上海的墨西哥公民于周四抵境并出现发热症状。该患者已被医院隔离,报道称其病情稳定。曾荫权补充说,香港卫生署与香港大学联合确诊了该病例。

墨西哥已确诊156个病例,其中9例死亡,但官方怀疑实际死亡接近180人。美国确诊109例,死亡1例——一名来自墨西哥的男孩死于德克萨斯州。目前已有13个国家报告发现病例,其中包括刚刚宣布首个感染病例的丹麦。

世界卫生组织最近统计有331个确诊病例,但这不包括各国政府和疾病控制部门的最新数据。
据英国广播公司报道,瑞士研究人员发现了土壤施肥过度导致植物物种多样性丧失的原因。这项发表于《自然》杂志的成果称,过量营养会放任快速生长植物主导生长环境,妨碍体型较小的物种吸收阳光。受此影响,很多物种开始逐渐消失。

这些瑞士苏黎世大学的科学家说,化学营养物的增多引起生态系统多样性丧失得到了广泛认可,但其确切机理却一直难以辨明。研究者之一安德鲁·赫克托耳表示,其研究团队通过实验证实,影响多样性的主要原因在于缺乏光照,而非物种竞争的加剧。

赫克托耳提到,这些发现并不能为环境保护提供“灵丹妙药”。他认为,“我们的研究显示了这种光照的竞争极端不平等。所以一株植物如果位于光照和其竞争者之间,它不仅能获得所有的光照,而且会阻止竞争者获得它们。因为光照竞争是绝对的‘胜者全得’, 所以对我们来说,控制富营养化尤为重要。”

科学家们警告,阻止多样性丧失需要更为严格的管控措施。数据显示,过去的50年来,植物可获得的氮、磷量都翻了一倍。路透社援引国际粮食政策研究所称,高粮价催生的买地热正在非洲等发展中国家流行,国家或私人投资者借此确保自身食品供应。研究所表示,自2006年以来,贫穷国家有 万至 万公顷的耕地被售出或者正处于洽谈阶段。
乔驰·冯·布朗是一家位于美国华盛顿的智库机构的总监,他认为土地收购激增是2007到2008年粮价暴涨和由此带来对库存耗竭恐慌的“自然后果”。 冯·布朗补充说,由于历年来仅有相对少量的土地出售,所以购买行为提升了地区土地价格。

在一份关于“攫取土地”的报告中,粮食政策研究所罗列了超过48项交易,其中一些发生在亚洲,而大多数在非洲。报告称,资金充裕但受限于土壤和水源的波斯湾和其他粮食进口国,是土地的主要购买者。“另外,中国、韩国和印度等人口众多但存在食品安全隐忧的国家,也正在寻求海外购地种粮的机会”。

研究所建议以“自由、优先区别和信息透明”作为土地交易标准,而对不具备所有权但传统使用土地的当地民众,研究所认为需“特别关照”他们的公平交易权。世界银行已表示将出台在投资者和国家间促进交易公平化的指导方针。

Saturday, September 1, 2018

中国城镇化不应盲目“摊大饼”

发改委副主任解振华近日称,中国的城镇化发展由速度扩展向质量提升转型势在必行。

8月27日,解振华在联合国开发计划署《2013中国人类发展报告》发布会上说:“城镇化进程中的矛盾和问题日益凸显,在城市发展可持续性、城市化空间布局、城市公共服务供给能力、城市治理能力等方方面面面临的挑战也更加严峻。”

解振华表示,由于以牺牲环境和社会公平为代价换取发展速度的做法已经难以为继。

解的观点与联合国开发计划署报告的发现不谋而合。报告指出,人口老化、社会差距扩大和环境恶化等问题将是当前中国在城镇化过程中面临的最大挑战,“想要正确处理好各种挑战,从时间上看已经非常紧迫”。

据《纽约时报》报道,在今后的12年内,中国政府计划将2.5亿农村人口转移到新建的城市和乡镇中。尽管由国务院制定的关于城镇化的具体规划尚未出台,一位内幕人士向媒体透露中国的目标是在2020年将城镇化率提高到60%。联合国开发计划署的报告则预期,中国的城镇化水平在2030年将达到70%,城市对国内生产总值的贡献也将达到75%。

如此大规模的城镇化将是价值不菲的。国家开发银行在今年五月曾预测,本轮城镇化将至少需要50万亿资金,几近于中国2012年全年国内生产总值。

城镇化的主力——中国的大小城镇——目前正为地方债务危机所困。而未经详细论证而草率上马的城镇化所导致的“鬼城化”将进一步加剧地方债务危机。

“城市的盲目扩张就像摊大饼,总有一天会因为地方财政过度紧张而泡沫破灭的。”发改委中国城市和小城镇改革发展中心主任李铁近期在接受《南华早报》采访时说。北京水务局称北京市水危机比干旱著称的中东地区更为严重。北京当前年均用水总量达36亿立方米,远超仅有21亿立方米的年均水资源总量,缺口达15亿立方米。北京人均水资源量仅为120立方米左右,远低于国际上的极度缺水标准。

据北京水资源公告数据显示,北京水资源总量的减少主要是由于地表水资源和地下水资源的衰减。近年来,北京市水资源总量比多年平均减少38%。

部分专家认为,快速增长的人口造成了中国首都当前的水危机。北师大水科院院长许新宜在去年曾表示,北京的水危机是一场“人祸”:“我们分析北京的水资源承载能力是1200万人,现在都是2000万人了。”

水环境专家王建也认为,限制城市人口过度增长才是最根本的的解决之道。“人口从400万增长到了2000万,这就是为什么生活用水每年都在长了,”他说,“把一个城市缩回去是不可能的,但人口不要再到2500万了,不要到3000万了。”

限制首都的人口过度增长或许是可行之道,但北京水务部门还是更乐意寄希望于耗资巨大的“南水北调”工程。预计于2014年竣工的“南水北调”工程中线将为北京带来10亿立方米的水资源。

然而“南水北调”工程重要水源地丹江口水库的污染问题却为该工程作为北京水危机解决方案的可行性划上了问号。流入丹江口水库的五条河流中的四条水质为劣五类,达不到日常使用水源标准。

中国环境科学院研究员赵章元在中央电视台今年6月18日播出的《经济半小时》中说:“在调水之前规划的时候想的很好,想调来一些一类水体,供北方缓和缺水之急。然而,如果等到建成以后,因为管理不当调来的竟是污水,将来只会成为一个祸患,把污水调来就等同于惹火烧身。”